ग़रीबी में भी आनंद होता है... "कॉलर पकड़ कर घसीटते हुए तुम्हें थाने तक ले जायूँगी..." माँ सुबह पाँच बजे, नौकरी पे जाती थी... टैम्पो स्टैंड घर से अच्छी-खासी दूरी पे था... माँ मुझसे कहती थी की मुझे वहाँ पे छोड़ आया करो... सर्दी का सुबह का समय होता था, घना कोहरा होता था, मुझसे उठा नहीं जाता था, पर फिर भी एक बार साथ चला गया... उस दिन टैम्पो स्टैंड पर एक सिपाही ने कुछ कमेंट बोला... तब माँ ने उसको कहाँ था... "कॉलर पकड़ कर घसीटते हुए तुम्हें थाने तक ले जायूँगी..., दुबारा इस तरह के कमेंट्स कहने की हिम्मत मत करना... " माँ ने अपने मालिक को वाकया बताया... वह माँ को बेटी की तरह मानते थे... वह रसूक वाले इंसान थे, तो उन्होंने थानाधिकारी को फ़ोन करके उसको वहां से हटाने को कह दिया... उसको हटा दिया गया, फिर भी वह माँ को दूर से घूरता रहता था, तब माँ ने मालिक से फिर बोला तो उन्होंने एस.एस.पी. और जिलाधिकारी को फ़ोन करवा कर उसको थाने से ही दूर हटवा दिया... मैं उम्र में बहुत छोटा था मुझे उस वक़्त उस कमेंट्स का मत...