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Showing posts from December, 2017

संसद में हमारे शहीद जवानों की शहादत की कम, पाकिस्तान की ज्यादा बात होती है...

संसद में हमारे शहीद जवानों की शहादत की कम पाकिस्तान की ज्यादा बात होती है...  फांसी पे झूलते किसानों की कम रूपया खाए सेठों और  रूपया लेकर भागे भगोड़ों की ज्यादा बात होती है... दहेज़ की आग भी जलती हुई बेटियों की कम  तलाक़ की ज्यादा बात होती है... ईमानदारी से  टैक्स भरते लोगों  की कम  घपलों, घोटालों की ज्यादा बात होती है...  संसद में हमारे... - सन

पहले में अपने शत्रुओं की गाली का जवाब गाली से देता था और अब शुभकामनाओं वाले एस.एम.एस. से देता हूँ...

पहले में अपने शत्रुओं की गाली का जवाब गाली से देता था और अब शुभकामनाओं वाले एस.एम.एस. से देता हूँ...    जवाब देने की मेरी आदत नहीं बदली... रोमिल-सनी-सुल्तान...राज

षड्यंत्र, लोभ, लालच त्याग दे

पवित्र आत्मा "नाज़" मुझसे कहती है कि सुल्तान तुम अपने शत्रुओं के लिए भी उस परम प्रधान परमेश्वर से प्रार्थना किया करो कि वोह उन पर अपनी कृपा करें।  ताकि वह भी यह षड्यंत्र, लोभ, लालच त्याग दे और  यह जो  षड्यंत्र का पर्दा उन पर  परमेश्वर ने चढ़ाया हुआ है उसको हटा दे और अपने दरबार में उनको भी जगह दें...     - सुल्तान        

मीठे जल से भरा सागर...

मीठे जल से भरा सागर...  कहते है यह जुबान, जो आशीर्वाद भी दे सकती है और श्राप भी... परन्तु सत्य यह नहीं है, क्योंकि सागर या तो मीठे जल से भरा हो सकता है या फिर खारे जल से भरा...  आम का पेड़, आम ही देता है वह भी मीठे... अनार या शहतूत नहीं देता है... यह प्रकृति की देन है... अब आप चाहे तो  प्रकृति से खिलवाड़ कर सकते है...  इस जुबान को मीठे  सागर वाला ही रहने दे तो अच्छा है... - सन

छड़ी को खटखटाकर ज़मीन पे अम्मा बोली, आज घूमने चलेंगे...

माँ, छड़ी को खटखटाकर ज़मीन पे  अम्मा बोली, आज घूमने चलेंगे...  जो राज़, इस राज ने अपने दिल में छुपा रखे है...  उसको आज खोजने चलेंगे...  अम्मा बोली, आज घूमने चलेंगे...  हम भी ज़रा सुने तो... राजा बेटा के दिल में कौन रहता है...  किसका दर्द इस छोटे से दिल में छुपा रखा है...  जो तू हर पल बस मुस्कुराता रहता है...  न तुझे ज़िन्दगी की फ़िक्र...  न तरक्की की आरज़ू...  न दौलत की चाहत...  न कोई सपना, न कोई ख़्वाब, न कोई उम्मीद...  न कोई रिश्तेदार न कोई दोस्त-यार क्या इस दुनिया में कोई इस तरह भी रहता है? तू तो हर बात पर मुस्कुरा कर टाल देता है...  जब देखो तब मुस्कुराता रहता है... बुद्धू... सुना न... आज तेरा दर्द सुनने को दिल करता है.. #रोमिल अरोरा

कभी किसी चीज़ के बारे में शिकायत नहीं की...

कभी किसी चीज़ के बारे में शिकायत नहीं की... सब कुछ ले लिया उससे, मगर उसने कभी वक़ालत नहीं की... यह घर, जिसमें उसकी माँ की यादें थी... यह घर ही तो उसका आखिरी ज़िन्दगी-ए-सुकून था.. खुदा तूने यह भी छीनने में देरी नहीं की.... -सन

नया साल आएगा खुशियों के साथ... आमीन !!!

यह साल तो बीत गया ग़म और नफ़रत के साथ...  नया साल आएगा खुशियों के साथ... आमीन !!!   - सन

सुबह का सूरज खुशीयाली लेकर आता है...

अम्मी मेरी कहती थी...  सुबह का सूरज खुशीयाली लेकर आता है...  हवा का झोका ज़िंदगानी लेकर आता है...  यह फूलों के खुशबू देखो कितने रंग बिखेरती है...  पंछी की आवाज़ें मधुर संगीत सुनती है...  सब खुदा का करम है..  सब खुदा का नूर है..  ~*~ अम्मी मेरी कहती  थी...   झूठ से हमेशा दूर रहो...  हर इंसान से इंसानियत करो...  सबमें है रब का नूर देखो  रब के दरबार में अर्ज़ियाँ दो...  सब रब का करम है..  सब रब का नूर है..  ~*~ अम्मी मेरी कहती  थी...   कोई न सोये भूखा यह दुआ करो...  हर कोई प्रेम से रहे यह दुआ करो...  सबको मिले शांति यह दुआ करो...  फिर न जले यह बस्तियाँ यह दुआ करो...  सब अल्लाह का करम है..  सब अल्लाह का नूर है..  #रोमिल अरोरा

सारे शत्रु एक तरफ

सारे शत्रु एक तरफ  रोमिल अरोरा एक तरफ...  सारे कुत्ते एक  तरफ... शेर का पुत्तर एक  तरफ... सारे जासूस, मुखबिर, टट्टू एक तरफ  ईमानदार एक  तरफ ... सारे भ्रष्टाचारी , घूसखोर एक तरफ गाँधी वाले तक तरफ...  - रोमिल

सैलरी के टुकड़े फेक कर सोचता है की हर नौकर कुत्ता निकले...

दरख़्त की तन्हाई में खड़ा मैं सोचा करता हूँ...  कि ज़िन्दगी के अरमान भी कैसे, किस तरह निकले...  प्राइवेट नौकरी है, दौलत का घमण्ड उसके सर पर सवार है...  सैलरी के टुकड़े फेक कर सोचता है की हर नौकर कुत्ता निकले...  सोचता हूँ, खुद को बेच दूँ...  आशियाना ईमानदार, स्वाभिमान का फूँक दूँ...  शायद यही अल्लाह को मंजूर हो... हम बेवफा ज़िन्दगी के लिए... बेवफा निकले... - सन

जब गलियों में बिखरे हुए मिल जाते है मुझे मखाने

जब गलियों में बिखरे हुए मिल जाते है मुझे मखाने मैं समझ जाता हूँ...  कोई खुदा का प्यारा,  खुदा को प्यारा हो गया... हाहाहा  - सन  

इन किताबों को बोझ मत कहो...

मियां, इन किताबों को बोझ मत कहो...  यह मेरी बाँहों में, मेरी पीठ पर महबूबा सी लिपटती है...  - सन

जिन घरों से बुजुर्गों की रौनक़ है चली जाती...

अम्मी मेरी कहती थी...  जिन घरों से बुजुर्गों की रौनक़ है चली जाती... लाख जला लो दिया, मग़र उन घरों से वीरानियाँ नहीं जाती...  #रोमिल अरोरा

LAKH LAAHNTA - RAVNEET (Full Song) Gupz Sehra | Mawin Singh | Latest Punjabi Songs 2017 | Juke Dock

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Song - LAKH LAAHNTA  Singer - RAVNEET  Lyrics -  SUKHI DIGOH  Music - GUPZ SEHRA  Starring - SHEHNAAZ GILL  Label :- JUKE DOCK

सच... चाहे खूबसूरत सी तस्वीर लगा लो...

सच  चाहे खूबसूरत सी तस्वीर लगा लो...  चाहे मीठे बोलों से खुद को सजा लो...  चाहे सोना, हीरे, जेवरात से खुद को ढाँप लो... चाहे मेरे कदमों में रुपयों, जायदाद का ढेर लगा लो... फिर भी मुझे नहीं पा सकोगी... पर तुमसे मुहब्बत थी, है और रहेगी...  मैने पहले ही तुमसे कहाँ था...  "तुमसे वफ़ा करूँगा तो माँ का गुनेहगार हो जायूँगा...  और बेवफाई यह रूह तुमसे करने नहीं देगी..." - राज

ग़रीब का सिर्फ ग़रीब होता है...

अम्मी मेरी कहती थी...  ग़रीब का सिर्फ ग़रीब होता है...  न राम, न रहीम होता है...  चार ज्ञान की किताबेँ लिखकर वह रब भी अपने घर आराम से बैठा है...  मैं पूछना चाहती हूँ... ऐ खुदा! क्या इस तरह जिम्मेदारियों का हक़ अदा होता है...  मैं तो सिर्फ़ इतना ही समझती हूँ...  किसी गरीब, मजबूर को दो वक़्त की रोटी खिलाने वाला... उसके आँसू पोछने वाला ही असली रब, असली खुदा होता है...  #रोमिल अरोरा

ग़रीबी में भी आनंद होता है...

ग़रीबी में भी आनंद होता है... "कॉलर पकड़ कर घसीटते हुए तुम्हें थाने तक ले जायूँगी..." माँ सुबह पाँच बजे, नौकरी पे जाती थी... टैम्पो स्टैंड घर से अच्छी-खासी दूरी पे था... माँ मुझसे कहती थी की मुझे वहाँ पे छोड़ आया करो... सर्दी का सुबह का समय होता था, घना कोहरा होता था, मुझसे उठा नहीं जाता था, पर फिर भी एक बार साथ चला गया... उस दिन टैम्पो स्टैंड पर एक सिपाही ने कुछ कमेंट बोला... तब माँ ने उसको कहाँ था...  "कॉलर पकड़ कर घसीटते हुए तुम्हें थाने तक ले जायूँगी..., दुबारा इस तरह के कमेंट्स कहने की हिम्मत मत करना... " माँ ने अपने मालिक को वाकया बताया... वह माँ को बेटी की तरह मानते थे... वह रसूक वाले इंसान थे, तो उन्होंने थानाधिकारी को फ़ोन करके उसको वहां से हटाने को कह दिया... उसको हटा दिया गया, फिर भी वह माँ को दूर से घूरता रहता था, तब माँ ने मालिक से फिर बोला तो उन्होंने एस.एस.पी. और जिलाधिकारी को फ़ोन करवा कर उसको थाने से ही दूर हटवा दिया...  मैं उम्र में बहुत छोटा था मुझे उस वक़्त उस कमेंट्स का मत...

नफ़रतों का भी एक क़द होना चाहिए... जुबान कभी भी गंदी नहीं होनी चाहिए...

अम्मी मेरी कहती थी...  बेटा... नफ़रतों का भी एक क़द होना चाहिए... जुबान कभी भी गंदी नहीं होनी चाहिए...  पीठ पे वार तो डरपोक किया करते है...  बहादुर बच्चे हो तुम, हर वार दुश्मन के सीने पे होना चाहिए...  बुराई... गुनाह... अश्लील कर्मो से दूर रहो...  देखना बेटा... खानदान पे... बुजुर्गों की कोठियों पे कोई दाग़ नहीं पड़ना चाहिए...  इन्साफ-पसंद रहो हमेशा... ईमान वाले बनो...   किसी शैतान... किसी ज़ुल्मी... के सामने यह सर नहीं झुकना चाहिए...  #रोमिल अरोरा

बस दिल को यह बात समझाने में उम्र गुज़र गई...

मैं चंद रोज़ की मुलाक़ातों में यह बात अच्छी तरह समझ गया था  कि तुम  औरत  अच्छी नहीं हो...  बस दिल को यह बात समझाने में उम्र गुज़र गई...  - सन  

गरीबी में भी आनंद होता है...

गरीबी में भी आनंद होता है...  "तुम लोग अपना इंतज़ाम कर लो..."  यह शब्द कहते हुए मेरे नाना ने यह तक नहीं सोचा की एक औरत अपने दो छोटे मासूम बच्चों को लेकर अकेले कहाँ रहेगी... ऐसे समाज में वह कहाँ जाएगी... मगर मेरी माँ हिम्मत, ताकत की मूरत थी... उन्होंने एक छोटे से किराये के कमरे में अपनी गृहस्ती बसा ली... जिसका किराया शायद ५०० या ७०० रूपया महीना था... उस छोटे से तहख़ाने जैसे कमरे में न जाने माँ ने और मैंने ज़िन्दगी के कितने साल बीता दिए... सच में नाना-नानी किसी ज़ालिम से कम नहीं थे... निर्दय लोग...    मगर ख़ुशी थी, वहाँ भी सुख था, शांति थी... हम सब साथ-साथ रहते थे... उस गरीबी में भी अपना एक सुकून, एक आनंद था... मेरी माँ ने फिर भी नाना-नानी का हमेशा उनका आदर-सम्मान करना सिखाया...        

अक्सर महंगे तोहफ़े देने वाले की नियत अच्छी नहीं होती है...

अम्मी कहती थी...  बेटियाँ... अपना दुःख छुपा लेती है...  अल्लाह ने इनको सब्र की दौलत बक्शी जो होती है...  गलतियाँ माफ़ कर दी जाती है बेटा...  मगर अपमान में माफ़ी की कोई गुंजाइश नहीं होती है...  न कहना सीखो... हक़ से न कहो...  शौहर के गुनाह में खुदा की बंदी कभी शरीक़ नहीं होती है...  बेटा... चंद मुलाक़ातें और इतना महँगा तोहफ़ा...  अक्सर महंगे तोहफ़े देने वाले की नियत अच्छी नहीं होती है...  #रोमिल अरोरा

गरीबी में भी आनंद होता है...

गरीबी में भी आनंद होता है... मुझे याद है लोकल बेकरी में जो बिस्कुट, रस बनाते समय टूट जाते थे वह थोड़ा सस्ते मिलते है...  वह हमारे तंगी के दिन थे... तोह हम लोकल बेकरी से टूटे हुए रस, बिस्कुट पन्नी में भरकर ले आते थे और चाय के साथ बहुत खाते थे... एक बार में ही सारे के सारे खत्म...  पारले-जी का दौर तो हमारी ज़िन्दगी में थोड़ी देर से आया... आज सिर्फ दो बिस्कुट चाय के साथ खा ले तो भी बहुत है... वह गरीबी में भी अपना एक  आनंद होता है...

ग़रीबी में भी आनंद होता है...

ग़रीबी  में भी आनंद होता है... मुझे यह कहने में कोई शर्म नहीं आती, मेरे नाना-नानी किसी ज़ल्लाद से काम नहीं थे... हम ननिहाल में ही पले-बढ़े.  मुझे एक वाकया आज भी याद है... माँ रात में आलू-मटर-पुलाव बनाने रसोई में गई... नानी ने बहुत बुरा-भला बोला माँ को और लगातार बोलती रही... माँ ने ग़ुस्से में आँखों में आँसू भरे हुए कुकर को फेंक दिया... और ऊपर कमरे में चली आई... हम ऊपर एक कमरे में माँ के साथ अकेले रहते थे... फिर थोड़ी देर बाद सोचा की बच्चे क्या खाएंगे रात में.... फिर माँ नीचे रसोई में गई और नाना-नानी की गालियाँ, गन्दी बातें सुनते हुए आलू-मटर-पुलाव बनाये... उसे लेकर ऊपर कमरे में आई... उस आलू-मटर-पुलाव में जो माँ के लिए अपने बच्चों के लिए प्यार था, जो स्नेह, दुलार, अपनापन वह आज पंजतारा होटल के खाने में भी नहीं मिलता... गरीबी में भी आनंद था, सुकून था, ख़ुशी थी...

मुझे धर्म में मत बाटों...

मुझे धर्म में मत बाटों मुझे दीवाली पे मिठाई... होली में गुझिया खाने दो...  ईद पर सेवईयां खाने दो...  गुरुपुरब पर हलवा खाने दो...  क्रिसमस पे केक खाने दो...  भैया... मुझे धर्म में मत बाटों... - रोमिल

फिर यह मेरी फ़िक्र का दिखावा क्यों?

अगर तुम मेरी जन्मदिन पर  कूड़े के ढ़ेर से एक कागज़ उठा कर  उस पर मुबारकबाद के दो शब्द ही लिख देते  तो मेरे लिए यह तोहफ़ा बेशकीमती होता... पर तुमसे यह भी न हो सका...  फिर यह मेरी फ़िक्र का दिखावा क्यों? - राज

तुम्हारी आदत

यह जो तुम्हारी आदत है न किताब पढ़ के भूल जाने की...  इसे इंसानो पे मत आजमाया करो तो अच्छा होगा..  वरना किसी दराज़ की अकेली क़िताब बन के रह जाओगी...   वैसे यह आवारागर्दी की आदत जो तुमने पाल रखी है...  यह खुश रहने की तरक़ीब है  या फिर  ग़म को भूला देने का नया सलीक़ा है कोई...  - सन

शक्कर ढ़ोने वाले बैल को भी खाने में भूसा ही मिलता है...

शक्कर ढ़ोने वाले बैल को भी खाने में भूसा ही मिलता है...

टीपू को गद्दी के लिए बग़ावत करनी पड़ी थी... और युवराज को ख़ुशी-ख़ुशी सिंहासन मिल गया...

टीपू को गद्दी के लिए बग़ावत करनी पड़ी थी... और युवराज को ख़ुशी-ख़ुशी  सिंहासन  मिल गया... यही फ़र्क होता है  माँ और बाप में...  माँ ख़ुशी-ख़ुशी सब कुछ अपने बच्चों को दे देती है...  और बाप से हक़ भी छीनना पड़ता है...  - सन

बेटा...हर दिन तालीम हासिल करो... खूब तालीम हासिल करो...

अम्मी कहती थी...  ज़मीन-ज़ायदाद का हक़ अब्बा देता है...  जब अब्बा ही अपना नहीं हुआ...  तो बेटा... कैसी ज़मीन, कैसी जायदाद, कैसा हक़...  बेटा... यह लड़ाई-झगड़ा... यह बहस-बाज़ी...  यह मोहल्ला में जाकर हंगामा करना...  यह बुजुर्गों को बैठाकर सुलह-मशवरे करना...  मैं पढ़ी-लिखी थी... इसलिए मुझसे यह सब नहीं हुआ...    बात दौलत की नहीं...  अगर मुहब्बत या हौसला-अफ़ज़ाई के दो बोल मिल जाते तो काफी होते...  यह भी मेरे अपने-मेरी रिश्तेदारों से नहीं हुआ...   भूखे रहना मंज़ूर है..  मगर तुम्हारे अब्बा से कुछ मांगना मेरी तौहीन होगी...  किसी भी औरत को कभी ज़िल्लत से ज़िन्दगी नहीं जीनी चाहिए...  बेटा...हर दिन तालीम हासिल करो... खूब तालीम हासिल करो...  इससे बड़ी कोई दौलत नहीं होगी...  #रोमिल अरोरा

पानी पर जहाज चल रहे है...

किसान ख़ुदकुशी कर रहे है...   इंसान बी.पी.एल. के ठप्पों के साथ मर रहे है...    आलू, प्याज, टमाटर के दाम तो बंधे नहीं बंधते... लोग भूख से मर रहे है...   पानी पर जहाज चल रहे है...  इतनी सारी है सरकारी योजनाएँ गरीब इसमें उलझ के मर रहे है...  मनरेगा... बंद पड़ी है फाइलों में मज़दूर, शहर-शहर, दर-दर भटक रहे है...        पानी पर जहाज चल रहे है...  कही दस लाख का सूट....  कही इटली में शादी का जश्न...  फिर क्यों धोती वाले गाँधी के जयकारे लग रहे है...  छोड़ो मियां...   - सन

बेटी को तालीम के जेवर पहनाओ...

अम्मी मेरी कहती थी.....  बेटी को तालीम के जेवर पहनाओ...  सर ढकना, अदब-तहज़ीब से बोलना सिखाओ...  डरो नहीं इनके हाथो में तलवार देने से...  हक़ से जीना, हक़ लेना सिखाओ... कभी कमरों में न क़ैद रह हँसी इनकी  इनकी हँसी से कोठियों को सजाओ...  देखो कभी आने न पाए इनके आँखों में आंसू इनके सपनों को पंख लगाओ...  इनकी ख्वाइशों को सर-आँखों से लगाओ...  बेटी को तालीम के जेवर पहनाओ...  #रोमिल अरोरा

अम्मी मेरी कहती थी...

अम्मी मेरी कहती थी...  बेटी तो अल्लाह का ईमान होती है,  अल्लाह का पैग़ाम होती है... पायल जब इनकी आँगन में झनकती है, तब जाकर कहीं शाम होती है...  मुस्कान से इनकी...  हवेलियाँ गुलज़ार होती है...  बेटी तो अल्लाह का ईमान होती है....  लफ़्ज़ों में तहज़ीब, होंठों में दुआ, नमाज़ों से कोठियों की सुबह होती है...    बेटी तो अल्लाह का ईमान होती है.... #रोमिल अरोरा

सूचना

सूचना मेरे यह ब्लॉग  https://sunny-raj.blogspot.in/ https://romil-raj.blogspot.com/ https://tereliye-sunny-raj.blogspot.in/ https://newchapter-sunny-raj.blogspot.in/ सिर्फ ब्लॉग ही नहीं है, यह बहुत पाक-साफ़ जगह है... यह इबादत की जगह है... यह किसी को पूजने की जगह है.... मैं नहीं चाहता की कोई भी चरित्रहीन यहाँ आये...  स्वयं-मूल्याँकन करो, अगर तुम घटिया, षड्यंत्रकारी, शातिर दिमाग़, चरित्रहीन, बाजारू, रांड/ रंडी, एक से अधिक के साथ शारीरिक संबंध रखने वाला/ वाली हो तो इन ब्लॉग पर अपना वक़्त जाया न करो... निवेदन यही रहेगा की कभी भी इन ब्लॉग्स पर न आओ...  रोमिल अरोरा     

तुम इसे बीमारी कह सकते हो...

तुम इसे बीमारी कह सकते हो...  पर मुझे आदत है सच लिखने की, सच बोलने की...  यह कारें तुम्हारी तुम्हें मुबारक हो...  मुझे आदत है पैदल चलने की...  यह हरी कड़क पत्तियों की हवाएँ तुम्हे अच्छी लगती हो...  पर मुझे आदत है धूप में सोने की...  बिकना बहुत आसान है, बिक तो मैं भी सकता हूँ... पर जो मेरे अंदर ईमानदारी का बुलबुला है, इसे आदत है रह-रह कर बुदबुदाने की...  - सन   

माँ की याद जैसे...

माँ की याद जैसे...  सनी...भालू... भूने हुए आलू नमक-मिर्च के साथ... सुबह की पहले चाय, चारपाई पे... बासी रोटी... घी, चीनी के साथ... नींबू का आचार... खीर... गाजर का हलवा... पालक-पनीर... करेला सरसों का साग-मक्के दी रोटी...  बोर्नविटा वाला दूध... बादाम... सेरेलैक क्रैक्स.... मिल्कबाऱ आइसक्रीम जॉनसन आयल...  चहरे पे छोटा सा काजल का टीका बालों में दो चोटी हेयर स्टाइल लाइक जेंटलमैन... कियो-कार्पिन आयल निक्कर-हॉफ पैंट हग्गिएस नागराज-ध्रूव की कॉमिक ड्राइंग बुक-स्केच पैन का पैकेट मैथ्स टेबल्स २ x २ = ५ बूट -पॉलिश ऎक्शन के शूज...  माँ दुर्गा पाठ सुखमनी साहिब... जपजी साहिब पाठ...

फिर न मिला मुझे खवाबों में, ख्यालातों में...

साथ छोड़ गया वह बातों-बातों में फिर न मिला मुझे खवाबों में, ख्यालातों में... *** किससे कहे अपना दर्द रोमिल कोई न मिला मुझे इन तन्हा रातों में... *** उसकी क़समों से कुछ ऐसा सजाया घर को दिल को जला कर रोशन होता रहा अँधेरी रातों में... *** बेवफाई करके कहते है वह अपनी लक़ीर ही नहीं थी तेरे हाथों में... - सन

देवी-देवताओं की कहानियाँ

जब हम देवी-देवताओं की कहानियाँ पढ़ते है... तब आपको यह एहसास होगा कि वह भी हम इंसानों की तरह ही है... वह हम इंसानों की तरह षडयंत रचते है, साज़िश करते है, शरारत करते है... एक-दूसरे देवी-देवता से ईर्ष्या करते है, कटु वचन बोलते है, लड़ाई-झगड़ा करते है... हम इंसानो की तरह ही तरह-तरह के पकवान खाते है, सुन्दर-सुन्दर वस्त्र पहनते है.... सजते-सवरते है... उनकी शादी होती है, उनके बच्चें होते है, फिर उनके बच्चों के बच्चे होते है... वह भी प्रेम करते है, विवाहबाह्य संबंध होते है...    कभी-कभी ऐसा लगता है कि हम इंसान ही देवता-तुल्य हो गए है... या फिर यह भी कह सकते है कि यह सभी  देवी-देवताओं की कहानियाँ हम इंसानों ने लिखी है इसलिए हम उनको अपने नज़रिए से देखते है...  यह फिलॉसिपी है... 

खुदा करे की अब हम खाक़ हो जाये...

दुनिया करती रही गुनाह सब माफ़ हो जाये...  हम उसका नाम भी ले ले तो गुनेहगार हो जाये... *** क्यों हमें दुनिया वाले समझते है दीवाना एक आरज़ू है दिल में हम पागल हो जाये...  *** काहे की मोहब्बत  काहे की इबादत जब रब ही दिल-ए-दुनिया से दूर हो जाये...  *** हमको इस मोहब्बत ने दिया ही क्या है  पहले तो टूटे थे सिर्फ  खुदा करे की अब हम खाक़ हो जाये...  - सन

वह स्वाभिमान था या फिर उसका अभिमान

मुझे आज तक नहीं समझ आया  वह स्वाभिमान था या फिर उसका अभिमान वह क्रोध था या फिर उसके दिल की उलझन वह हार कर खुश था या फिर किसी जीत के नशे में था उसे अपने बच्चों से प्रेम नहीं था या फिर कोई मजबूरी थी... वह न मेरी ख़ुशी में था न मेरे दर्द में मेरे साथ था...  फिर भी  मैं उसके जनाज़े में शामिल क्यों था... मैं उसके मरने पे उसके साथ क्यों था... क्यों आज भी उसकी मौत का मातम मनाता हूँ...  मुझे नहीं पता...  मेरे बाप का स्वाभिमान था या फिर उसका अभिमान...  - सनी       

नमक वाले बाऊजी...

मियां... मेरा बाप नमक बेचता था...  अब या तो मैं नमक हलाल बनूँगा या फिर नमक हराम...  नमक वाले बाऊजी...  हाहाहाहा  - सनी

समझ नहीं आता यह नाकामी मेरी खुद की है... या फिर उसकी दी हुई है...

समझ नहीं आता यह नाकामी मेरी खुद की है...  या फिर उसकी दी हुई है...  मैं जैसा हूँ.... मैं वैसा तो नहीं था...  जैसा मैं बनता जा रहा हूँ...   मुस्कराहट... मगर अंदर-अंदर उलझनों से भरी...   अब तो दिन में सड़क तक आने में, रोशनी से डरने लगा हूँ...   क्यों मैं ऐसा बनता जा रहा हूँ...  समझ नहीं आता यह नाकामी मेरी खुद की है...  या फिर उसकी दी हुई है...  मैं पहले से ही टूटा था... या माँ-बाप की मौत ने मुझे बिखेर दिया है... - सनी

कहते है बेटे, बाप की आन-बान -शान होते है...

कहते है बेटे, बाप की आन-बान -शान होते है... वैसे तो उम्र भर रिश्तों में कड़वाहट रही... पर फक्र से सर ऊंचा भी रहा... ज़िन्दगी रोज लेती रही आह पर बाप पुकारता हुआ एक शब्द भी रहा... वैसे तो मुलाक़ात के लिए पलों की कोई कमी न थी... पर अपनी मुलाक़ात का वक़्त तो बाप का जनाज़ा रहा... कई बार मैंने यह सवाल पूछा है खुद से सूरज के रहते अपनी ज़िन्दगी में क्यों इतना अंधियारा रहा... - सनी

नोटिस

नोटिस स्वयंभू मित्र...  १- मैं पहले भी बता चूका हूँ, मेरी सिर्फ एक ही मित्र थी और है.... नाज़... वह अल्लाह मियाँ को प्यारी हो चुकी है...  २- नाज़ के बिना मेरा कोई नहीं है. जो कोई कहता है मुझे अपना मित्र वह सरासर झूठ है... गूगल+ पे जितने भी लोग मेरे साथ जुड़े हुए है मैं उनको ठीक प्रकार से जानता-पहचानता भी नहीं... सिर्फ सोशल साइट की वजह से जुड़ें हुए है...  ३- सब मेरे स्वयंभू मित्र बने हुए है...  रोमिल अरोरा

अब्बा के बिना अब हम अकेले है...

पतंग भी बहुत उड़ाई है कंचे भी खूब खेले है अब्बा के बिना अब हम अकेले है... नमक की बोरी चुटकी की पुड़िया तांगे संग घोड़ों ने भी खूब दौड़ लगाई है... वह गाली-गलौज  ढाबा का खाना रामलीला की सैर हमने भी माँ के बिना ज़िन्दगी बिताई है... - सनी 

तेल मालिश... तेल मालिश

तेल मालिश तेल मालिश रात को जब अब्बा दुकान से थके-हारे घर को आते मेरे छोटे-छोटे, नन्हे-नन्हे हांथों से सर पे चम्पी जरूर करवाते हम भी तेल लेकर बिस्तर पर शुरू हो जाते तेल मालिश तेल मालिश कभी तबला कभी थपकी कभी सर को दबाते  कभी अब्बा के कानों में गुनगुनाते   तो कभी ज़ोर-ज़ोर से उनके सर के बाल पकड़-पकड़ हिलाते हम भी तेल लेकर शुरू हो जाते तेल मालिश तेल मालिश बिस्तर की चादर पर जब तेल गिर जाता तो अम्मी चिल्लाती तौलिया जब तेल से सन जाता तब अम्मी खूब डांट लगाती पर हम नहीं मानते हर रात फिर शुरू हो जाते तेल मालिश तेल मालिश - सनी 

मैं, अब्बा और मेरी पहली साइकिल

मैं, अब्बा और मेरी पहली साइकिल मन में मेरे ख़ुशी के दीप जगमगाये थे   अब्बा मेरे लिए साइकिल लेकर आये थे... नन्हे-नन्हे क़दमों से जब मैं पैडल मारता  गोल-गोल जब पहिया घूमता  अब्बा देख-देख मुस्कुराये थे  अब्बा मेरे लिए साइकिल लेकर आये थे...  मुझमें हिम्मत भर खुद साइकिल पर बिठाते साइकिल सीट पकड़े-पकडे पीछे मेरे खूब दौड़ लगाते  जब मैं गिर जाता तो फिर मुझे उठाते घुटनों से मेरी मिट्टी छाड़ते   शाम को रोज़ ऐसे सुहाने पल आये थे    अब्बा मेरे लिए साइकिल लेकर आये थे आइसक्रीम खाते साथ-साथ चलते   बातें करते  हाथों से साइकिल का हैंडल पकड़े कितने पल हमने साथ-साथ बिताये थे  अब्बा मेरे लिए साइकिल लेकर आये थे मैं और मेरी साइकिल आज भी अब्बा तो याद करते है... - सनी

अब्बा प्यार तो बहुत करता है बस कह नहीं पाता.

दूर खड़ा अपना मीठा आशीर्वाद देता रहता  अब्बा प्यार तो बहुत करता है बस कह नहीं पाता. समय के साथ पग-पग साथ चलता रहता तुम गिरते तो उठा लेता कभी समझाता कभी डाँटता तुम थके-खड़े रहते तो फिर चलने को कहता  हिम्मत देता अब्बा प्यार तो बहुत करता है बस कह नहीं पाता. बच्चों को मजबूत बनाता अपने सपनो को सच करना सिखाता कन्धों पर अपने बोझ उठाकर बच्चों का जीवन सँवारता अब्बा प्यार तो बहुत करता है बस कह नहीं पाता.    - सनी    

०७. १२

कुछ ख़ास बात नहीं बस अब्बा अल्लाह मियाँ को प्यारे हो गए थे! - सनी