वह स्वाभिमान था या फिर उसका अभिमान
मुझे आज तक नहीं समझ आया
वह स्वाभिमान था या फिर उसका अभिमान
वह क्रोध था या फिर उसके दिल की उलझन
वह हार कर खुश था या फिर किसी जीत के नशे में था
उसे अपने बच्चों से प्रेम नहीं था या फिर कोई मजबूरी थी...
वह न मेरी ख़ुशी में था न मेरे दर्द में मेरे साथ था...
फिर भी
मैं उसके जनाज़े में शामिल क्यों था...
मैं उसके मरने पे उसके साथ क्यों था...
क्यों आज भी उसकी मौत का मातम मनाता हूँ...
मुझे नहीं पता...
मेरे बाप का स्वाभिमान था या फिर उसका अभिमान...
- सनी
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