देवी-देवताओं की कहानियाँ

जब हम देवी-देवताओं की कहानियाँ पढ़ते है... तब आपको यह एहसास होगा कि वह भी हम इंसानों की तरह ही है... वह हम इंसानों की तरह षडयंत रचते है, साज़िश करते है, शरारत करते है... एक-दूसरे देवी-देवता से ईर्ष्या करते है, कटु वचन बोलते है, लड़ाई-झगड़ा करते है... हम इंसानो की तरह ही तरह-तरह के पकवान खाते है, सुन्दर-सुन्दर वस्त्र पहनते है.... सजते-सवरते है... उनकी शादी होती है, उनके बच्चें होते है, फिर उनके बच्चों के बच्चे होते है... वह भी प्रेम करते है, विवाहबाह्य संबंध होते है...   

कभी-कभी ऐसा लगता है कि हम इंसान ही देवता-तुल्य हो गए है... या फिर यह भी कह सकते है कि यह सभी  देवी-देवताओं की कहानियाँ हम इंसानों ने लिखी है इसलिए हम उनको अपने नज़रिए से देखते है... 

यह फिलॉसिपी है... 

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