तुम्हारी आदत
यह जो तुम्हारी आदत है न किताब पढ़ के भूल जाने की...
इसे इंसानो पे मत आजमाया करो तो अच्छा होगा..
वरना किसी दराज़ की अकेली क़िताब बन के रह जाओगी...
वैसे यह आवारागर्दी की आदत जो तुमने पाल रखी है...
यह खुश रहने की तरक़ीब है
या फिर
ग़म को भूला देने का नया सलीक़ा है कोई...
- सन
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