फिर न मिला मुझे खवाबों में, ख्यालातों में...

साथ छोड़ गया वह बातों-बातों में
फिर न मिला मुझे खवाबों में, ख्यालातों में...
***
किससे कहे अपना दर्द रोमिल
कोई न मिला मुझे इन तन्हा रातों में...
***
उसकी क़समों से कुछ ऐसा सजाया घर को
दिल को जला कर रोशन होता रहा अँधेरी रातों में...
***
बेवफाई करके कहते है वह
अपनी लक़ीर ही नहीं थी तेरे हाथों में...

- सन

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