समझ नहीं आता यह नाकामी मेरी खुद की है... या फिर उसकी दी हुई है...
समझ नहीं आता यह नाकामी मेरी खुद की है...
या फिर उसकी दी हुई है...
मैं जैसा हूँ....
मैं वैसा तो नहीं था...
जैसा मैं बनता जा रहा हूँ...
मुस्कराहट... मगर अंदर-अंदर उलझनों से भरी...
अब तो दिन में सड़क तक आने में, रोशनी से डरने लगा हूँ...
क्यों मैं ऐसा बनता जा रहा हूँ...
समझ नहीं आता यह नाकामी मेरी खुद की है...
या फिर उसकी दी हुई है...
मैं पहले से ही टूटा था... या माँ-बाप की मौत ने मुझे बिखेर दिया है...
- सनी
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