ग़रीब का सिर्फ ग़रीब होता है...
अम्मी मेरी कहती थी...
ग़रीब का सिर्फ ग़रीब होता है...
न राम, न रहीम होता है...
चार ज्ञान की किताबेँ लिखकर वह रब भी अपने घर आराम से बैठा है...
मैं पूछना चाहती हूँ... ऐ खुदा! क्या इस तरह जिम्मेदारियों का हक़ अदा होता है...
मैं तो सिर्फ़ इतना ही समझती हूँ...
किसी गरीब, मजबूर को दो वक़्त की रोटी खिलाने वाला... उसके आँसू पोछने वाला ही असली रब, असली खुदा होता है...
#रोमिल अरोरा
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