बेटा...हर दिन तालीम हासिल करो... खूब तालीम हासिल करो...
अम्मी कहती थी...
बेटा... यह लड़ाई-झगड़ा... यह बहस-बाज़ी...
भूखे रहना मंज़ूर है..
ज़मीन-ज़ायदाद का हक़ अब्बा देता है...
जब अब्बा ही अपना नहीं हुआ...
तो बेटा... कैसी ज़मीन, कैसी जायदाद, कैसा हक़...
बेटा... यह लड़ाई-झगड़ा... यह बहस-बाज़ी...
यह मोहल्ला में जाकर हंगामा करना...
यह बुजुर्गों को बैठाकर सुलह-मशवरे करना...
मैं पढ़ी-लिखी थी... इसलिए मुझसे यह सब नहीं हुआ...
बात दौलत की नहीं...
अगर मुहब्बत या हौसला-अफ़ज़ाई के दो बोल मिल जाते तो काफी होते...
यह भी मेरे अपने-मेरी रिश्तेदारों से नहीं हुआ...
भूखे रहना मंज़ूर है..
मगर तुम्हारे अब्बा से कुछ मांगना मेरी तौहीन होगी...
किसी भी औरत को कभी ज़िल्लत से ज़िन्दगी नहीं जीनी चाहिए...
बेटा...हर दिन तालीम हासिल करो... खूब तालीम हासिल करो...
इससे बड़ी कोई दौलत नहीं होगी...
#रोमिल अरोरा
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