अच्छा लगा
अच्छा लगा था,
पहली दफ़ा अच्छा लगा था,
भाषण में गरीब, मजदूर, किसान का नाम सुनकर।
मैं सोचा कि कही फिर कुछ न बंदी कर दे,
भय मन में बैठ गया था,
ध्यान तुरंत ही रसोई के खाली डिब्बों की तरफ गया था।
पर अबकी वक़्त रात के ०८ बजे का नही,
दिन के ०४ बजे का था।
पहली दफ़ा अच्छा लगा था।
कोई फ़र्क नही पड़ता कि बक़रीद नहीं बोली, गुरुपर्ब नहीं बोला, क्रिसमस नही बोला, नया साल नही बोला,
सिर्फ नवंबर तक ही बोला।
इससे कोई फ़र्क नही पड़ता।
भाषण में गरीब, मजदूर, किसान का नाम लिया।
उनके लिए कुछ किया।
अच्छा लगा,
पहली दफ़ा अच्छा लगा।
:-)
#रोमिल राज
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