इस देश का नुकसान जितना यहाँ के लोगों ने किया हैं, उतना बाहरी लोगों ने नहीं किया है।

इस देश का नुकसान जितना यहाँ के लोगों ने किया हैं,
उतना बाहरी लोगों ने नहीं किया है।

आप इतिहास उठा के देख लो।
ईस्ट इंडिया कंपनी हो या फिर मुग़ल सल्तनत या फिर राजा-महाराजाओं का मतभेद, 
सबका इस देश के लोगों ने ही साथ दिया सिर्फ अपने फायदे के लिए।
नुकसान इस देश के लोगों ने ही किया खुद का।

खींचा-तानी में अच्छी ख़ासी मध्य प्रदेश की सरकार गिर गई।
प्रोजेक्ट रुक गए होंगें, प्रोजेक्ट की कॉस्ट बढ़ गई होंगी, ऑफीसर्स के बेमतलब ट्रांसफर हो गए, आपदा प्रबंधन में पीछे रह गए।
खिचड़ी लोगों की सरकार बन गई।

बंगाल का दंगल हम रोज़ देखते है।
न जाने कितने शहीद हो गए इस दंगल में।
न जाने कितने परिवार उजड़ गए इस दंगल में।
फिर भी हम नही सुधरे।

दिल्ली का कॉमेडी सर्कस तो रोज़ ही दिखाई देता है।

राजस्थान की नूरा कुश्ती हम सब देख ही रहे है।
अब न जाने कितने समय तक विकास कार्य रुके रहेंगे।
कैबिनेट कोई निर्णय नही ले पायेगी।
यह दुम खीचने का सिलसिला न जाने कितने वर्षों तक चलता रहेगा।

इस देश का नुकसान जितना यहाँ के लोगों ने किया हैं,
उतना बाहरी लोगों ने नहीं किया है।

डबल इंजन की गाड़ी के चक्कर में, गाड़ी ही रुक-थम सी गई है।
विकास के कार्य बाधित हुए।
प्रोजेक्ट की कॉस्ट बढ़ गई।
लोगों का बेफालतू ट्रांसफर हुआ।
नतीज़ा सिफ़र ही रहा।
पर हां
लोगों का एंटरटेनमेंट खूब हुआ। लोगों ने एन्जॉय खूब किया।

#रोमिल राज

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