हमको "गिद्ध" कहने वालों... तुमको आईना तो वक़्त दिखाएगा। तुमको जवाब वक़्त देगा।
हमको "गिद्ध" कहने वालों...
तुमको आईना तो वक़्त दिखाएगा।
तुमको जवाब वक़्त देगा।
लोगों का "इम्युनिटी सिस्टम" हमारी आलोचनाओं की वजह से नहीं ख़राब हुआ है।
इसे ख़राब "सरकार की वातावरण अनदेखी" ने किया है,
खान-पान की चीज़ो को "मिलावट" "दूषित" होने से न बचा पाने ने किया है।
तुमको आईना तो वक़्त दिखाएगा।
नदी, सागर को कचरे से भर देने वालों,
उत्तराखंड की बाढ़ को भूल गए हो क्या?
या फिर टिड्डियों से हुआ फसलों को नुकसान नहीं दिखता?
यह आफतें हमारी आलोचनाओं की वजह से नहीं आई है।
यह जो "सरकार की वातावरण अनदेखी" है उसकी वजह से आई है।
तुमको जवाब वक़्त देगा।
न जाने कितने बरसों से बुंदेलखंड भूमि प्यासी है,
न जाने कितने सालों से आरक्षण की लड़ाई चली आ रही है,
कश्मीर का मामला आज तक जीवित है, कभी मरा नहीं,
लोग "हिंदी" को केवल एक दिवस बनाकर आज भी "अंग्रेजी" के गुलाम बने हुए है।
"सोने की चिड़िया" कहे जाने वाले देश में आज भी लोग "बी.पी.एल.कार्ड" लिए फिरते है।
इन सब की वजह हमारी आलोचना नहीं है।
तुमको आईना तो वक़्त दिखाएगा।
तुमको जवाब वक़्त देगा।
मजबूर इंसान सड़क पर पड़ा मर रहा होता है, और लोग वीडियो बनाते रहते है,
यह "सोशल मीडिया विश्वविद्यालय" में पढ़ने वाले लोग है।
इनकी संवेदनशीलता हमारी आलोचना ने नहीं छीनी है।
हमको "गिद्ध" कहने वालों...
तुमको आईना तो वक़्त दिखाएगा।
तुमको जवाब वक़्त देगा।
- रोमिल राज
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