मैंने माँ को बिखरते हुए देखा है...
मैंने माँ को बिखरते हुए देखा है...
छुप-छुप के आंसू पोछते हुए देखा है...
बेटे के ग़म में रोते हुए देखा है...
कई मायने में, मैं भी माँ का गुनेहगार रहा हूँ...
मैंने खुद को बात-बात पे अकड़ते हुए देखा है...
और
मेरा भाई मेरे हक़ में बोलने से डरता है...
मैंने रिश्तों को बाज़ारों में बिकते हुए देखा है...
#रोमिल अरोरा
छुप-छुप के आंसू पोछते हुए देखा है...
बेटे के ग़म में रोते हुए देखा है...
कई मायने में, मैं भी माँ का गुनेहगार रहा हूँ...
मैंने खुद को बात-बात पे अकड़ते हुए देखा है...
और
मेरा भाई मेरे हक़ में बोलने से डरता है...
मैंने रिश्तों को बाज़ारों में बिकते हुए देखा है...
#रोमिल अरोरा
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