अनेकों-अनेक पवित्र आत्माएं

पवित्र आत्मा नाज़ कहती है... 

इस ब्रह्मांड में अनेकों-अनेक पवित्र आत्माएं है, जो विचरण कर रही है... इस संसार में न जाने कितनी मज़ारे है जहाँ लोग अपना माथा टेकते है और अरदास लगते है... और उनकी अरदास पूरी भी होती है...  

पवित्र शास्त्रों में तो अपने पूर्वजों को भी पूजने को कहाँ गया है... क्योंकि वह भी आपकी मनोकामनाएं पूरी करते है...

ऐसी अनेक पवित्र आत्माएं है, जिनको लोग पुकारते भी नहीं है... कभी उनका सिमरन भी नहीं करते, फिर भी वह अपना आशीर्वाद देती है लोगों को... 

मैं तो तनिक मात्र भी नहीं हूँ सुल्तान... अनेकों-अनेक शुद्ध और पवित्र आत्मायें है... 

- सुल्तान

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