लानत है बुजुर्गों में अब वह धमक नहीं रही...
लानत है बुजुर्गों में अब वह धमक नहीं रही...
दादी की आवाज़ में शेरनी की आवाज़
और
दादा की मूछों में शेर की पूछ जितने बाल नहीं रहे...
"घर के आँगन के बीच में तख़्त पर बैठी दादी
अंगीठी में आग सेकती हुई
पास से जो गुज़र जाये सर झुकाती हुई पोतियाँ
तो पास बुलाकर बादाम की चार गिररियाँ दे देती...
और
डेरिंग से कहती
माँ से बोलना
दादी के लिए चाय और मेथी की दो मट्ठी ले आये..."
बुजुर्गों में अब वह गुर्राहट नहीं रही...
#रोमिल अरोरा
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