वही द्धेष, वही क्लेश
वही द्धेष, वही क्लेश
वही लोभ, वही षड़यंत्र
जैसा धार्मिक कथाओं की बात हो...
आज भी ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे कल की ही लिखी हुई बात हो...
कल कौरव-पांडव लड़ते थे
आज भी भाई-भाई ज़मीन के टुकड़े के लिए लड़ते थे...
रुपियों के लिए खींचा-तानी करते है...
कल सीता को कोई रावण हरण कर ले जाता था...
आज मासूम बच्चियों की अज़्मत कोई दरिंदा लूट लेता है...
प्रस्थितियाँ पहले जैसी ही है...
पहले भी लोभ, षड़यंत्र का घाना कोहरा था...
आज भी वैसा ही कोहरा छाया है...
युगों-युगों से सत्ता की लड़ाई थी...
आज भी वही सत्ता की लड़ाई जारी है...
- सन
वही लोभ, वही षड़यंत्र
जैसा धार्मिक कथाओं की बात हो...
आज भी ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे कल की ही लिखी हुई बात हो...
कल कौरव-पांडव लड़ते थे
आज भी भाई-भाई ज़मीन के टुकड़े के लिए लड़ते थे...
रुपियों के लिए खींचा-तानी करते है...
कल सीता को कोई रावण हरण कर ले जाता था...
आज मासूम बच्चियों की अज़्मत कोई दरिंदा लूट लेता है...
प्रस्थितियाँ पहले जैसी ही है...
पहले भी लोभ, षड़यंत्र का घाना कोहरा था...
आज भी वैसा ही कोहरा छाया है...
युगों-युगों से सत्ता की लड़ाई थी...
आज भी वही सत्ता की लड़ाई जारी है...
- सन
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