एक न एक दिन तो तुम्हारे घर में भी मातम होगा
कौन सा ऐसा घर है जो खुदा के क़हर से बचा होगा.
एक न एक दिन तो तुम्हारे घर में भी मातम होगाकोई सफ़ेद कपड़ो में लिपटा ज़मीन पर पड़ा होगा.
रोने-धोने की आवाज़ तुम्हारे घर से भी आ रही होगी
लोगों का घर में हुजूम ठसा-ठस भरा होगा.
तुम्हारी आँखों से आँसुओं का सेहलाब बह रहा होगा.
वक़्त ज़िन्दगी को तुम्हारी डस रहा होगा.
दूर कही खड़ा मैं हँस रहा हूँगा
ज़ोर-ज़ोर से
बहुत ज़ोर
बहुत जोर-जोर से हँस रहा हूँगा.
- सन
Comments
Post a Comment