माँ बहुत अजीब होती है

माँ बहुत अजीब होती है
बच्चों के फिर्क में लिपटी रहती है रात भर 
सोती नहीं पूरा 
थोड़ा-थोड़ा जागती है.
माँ बहुत अजीब होती है.

सबसे पहले सुबह उठती
दरवाजों की कुण्डियां खोलती
फिर मुझे उठाती
पापा के लिए चाय बनाती 
टिफ़िन लगाती 
मुझे सजाती 
स्कूल छोड़ कर आती
नींद में ही भागती-दौड़ती है.
माँ बहुत अजीब होती है.

गमलों में रोज़ पानी देती
घर को साफ़-सुथरा रखती
नई आशायें बुनती
दूध उबालते हुए गाना गुनगुनाती
बच्चों के फ़िक्र में खोई-खोई रहती है 
माँ बहुत अजीब होती है.

चहरे पे नील लिए हल्का-हल्का मेकप भी करती
सब्जी-राशन के लिए दौड़-धूप करती
कभी टीचर तो कभी सहेली बनती  
आँचल में रूपया छुपाये रहती  
माँ बहुत अजीब होती है.

- सन

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