ज़िन्दगी

मेरी ज़िन्दगी जैसे एक कोरे कागज़ की तरह
न कोइए रंग
न कोइए पहचान हो जिसकी.
बे-मतलब,
बे-मकसद,
एक कोरे कागज़ की तरह.
जितना भी देखना चाहो उसमे
मगर कुछ न दिखाई दे.
मेरी ज़िन्दगी जैसे एक कोरे कागज़ की तरह
उतनी ही साफ़
उतनी ही सुन्दर
न उसमे किसी का रंग चढ़ा हो.
मेरी ज़िन्दगी जैसे एक कोरे कागज़ की तरह...
- Sun

Comments

Popular posts from this blog

Man Chhod Vyarth Ki Chinta Tu Shiva Ka Naam Liyeja

Chalta jaye samay ka ghoda...