प्रकृति
प्रकृति जो चाहती है वह निर्माण करती है... समय-समय पर निर्माण करती रहती है, ऐसा नहीं कि ७ दिनों में यह दुनिया बन गई... प्रकृति जब चाहती है तब निर्माण करती है.... उसे जब लगता है की इसकी जरुरत है तब निर्माण करती रहती है... अगर ऐसा कहा जाये की वह निरंतर निर्माण में लगी है तो गलत नहीं होगा...
माँ पार्वती ने गणेश जी का जन्म स्वयं किया... शिव जी ने उनकी इच्छा नहीं मानी तो उन्होंने स्वयं गणेश जी का निर्माण किया... नरसिंघ जी, वरहा अवतार हो या फिर माँ दुर्गा के अनेकों-अनेक रूप...
कई ऐसे पंछी, जानवर, पेड़-पौधे या फिर इस ब्रह्मांड में है जो समय-समय निर्माण होता रहता है और समय-समय पर लुप्त भी होता रहता है...
प्रकृति थी, है और हमेशा रहेगी...
यह फिलॉसफी है...
यह फिलॉसफी है...
Comments
Post a Comment