शिवलिंग...
शिवलिंग.... मैं उसको इस नज़र से देखने का प्रयास करता हूँ.... लिंग यानि आत्मा... जो शरीर रुपी योनि में जकड़ा हुआ है.... जिसका ब्रह्मा की तरह निर्माण किया गया है, जिसका विष्णु की तरह पालन करना है और उस पर पानी की बूँद उस आत्मा को जागृत करने के लिए है.... ताकि आपकी आत्मा न सोये.... वह हमेशा जागृत रहे....
हम लोग शिव मंदिर में देखते है कुछ लोग ताली बजा कर, आवाज़ लगाकर शिवा जी को जगाते है.... समझना यह है की वह आत्मा को जगा रहे है...
अगर आपकी आत्मा जागृत हो गई तो आपको आत्मज्ञान प्राप्त हो गया...
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