त्रिमूर्ति...

त्रिमूर्ति... हर किसी इंसान को त्रिमूर्ति होना चाहिए... ब्रह्मा की तरह निर्माता... विष्णु की तरह पालक... और शिवा की तरह नाशक...

समझना यह है कि हम सब त्रिमूर्ति है.... निर्माण करने वाले, नया जन्म देने वाले... फिर उसका पालन करने वाले पालक बनकर.... फिर अपनी इच्छाओं का नाश करने वाले.... जब नाशक की बात होती है तो यह नहीं है कि हम सब विध्वंस कर दे, सब अपने निर्माण नष्ट कर दें, बल्कि अपने जीवन के अंतिम समय हम अपनी इच्छाओं, लालसा, वासना, तमन्ना इन सब का नाशकर अंतिम समय मोक्ष को पर्याप्त हो....

 हम सब त्रिमूर्ति है....

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