‘प’
‘प’
हम जिंदगी भर ‘प’ के पीछे भागते रहते है। जो मिलता है वह भी ‘प’ और जो नहीं मिलता वह भी ‘प’।
पति - पत्नी - पुत्र - पुत्री - परिवार- पैसा - प्यार - पद - प्रतिष्ठा - प्रशंषा ।
प्राणनाथ अरोरा - पप्पी वालिया - पवन मेहरोत्रा - पूनम सिंह - परी
हम ‘पाप’ करते है यह भी ‘प’ है। फिर हमारा ‘प’ से ‘पतन’ होता है और अंत मे बचता है
सिर्फ ‘प’ से ‘पछतावा’।
सिर्फ ‘प’ से ‘पछतावा’।
मृत्यु के पश्चात हम ‘प’ से ‘परमात्मा’ को पाते है ।
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