तरक्की सारे ऐब छुपा देती है, थोड़ी सी बेवफाई घर जला देती है।
तरक्की सारे ऐब छुपा देती है
थोड़ी सी बेवफाई घर जला देती है।
वोह क्या लगाएगी तेरी कीमत
जो खुद अपनी बोली लगा देती है।
सियासत के शहनशा, बुत बनाकर खुद को खुदा समझते है
भूल गए है जनता उनको आइना दिखा देती है।
और सब पता है उसे अच्छा-बुरा
पर क्या करे मोहब्बत इंसान को दीवाना बना देती है।
- रोमिल
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