इन दिनों खर्चे बहुत है ज़िन्दगी जीने में

इन दिनों खर्चे बहुत है ज़िन्दगी जीने में
कौन जाये रोमिल, फिर भी, लखनऊ की गलियाँ छोड़ कर...

है हसरत-ए-दिल की मौत मुझे यही आ जाये तो अच्छा है
लोग नहीं रोमिल, ज़मीन तो तेरी अपनी है...

दुनिया में कौन किसकी लेता है खबर
तुम भी चले चलो, रोमिल, ज़िन्दगी-ए-कारवां भी लम्बा है...

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