चलो लुफ्त गर्मियों के उठाते हैं
चलो लुफ्त गर्मियों के उठाते हैं
इस तपती हुई धूप में गन्ने का रस पीने जाते है.…
किसी पेड़ के नीचे चबूतरे पर बैठकर हम दोनों बर्फ का गोला खाते हैं...
और
बहुत दिन हो गये आम का पन्ना भी नहीं पिया
न ही ठंडा मिश्रंबु वाला दूध पिया
न ही लस्सी… न ही शिकंजी…
न ही लस्सी… न ही शिकंजी…
यही पास की दुकान में सुना हैं
कुल्फ़ी, कुल्हड़ में मिलती हैं
उस पर रबड़ी, रूह-अफज़ा डालकर खाते हैं...
चलो लुफ्त गर्मियों के उठाते हैं
चलो लुफ्त गर्मियों के उठाते हैं!!!
सुल्तान
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