ज़ख्मो की नुमाइश बहुत हुई मोहब्बत में रुसवाई बहुत हुई
ज़ख्मो की नुमाइश बहुत हुई
मोहब्बत में रुसवाई बहुत हुई
वोह हो गई किसी और कि अपनी आजमाइश बहुत हुई।
एक दिन बाप ने देख लिया उसको किसी लड़की के साथ
बोला बेटा ! अब दुकान संभाल पढाई बहुत हुई।
अब सियासत वालों कुछ और कानून संसद में लाओ
भूमि अधिनियम पर गुफ्तगु बहुत हुई।
और बूढी माँ को कौन रखेगा अपने पास
इस बात को लेकर भाइयों में लड़ाई बहुत हुई।
- रोमिल
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