इससे ज्यादा और क्या रोज़ेदारी होगी
इससे ज्यादा और क्या रोज़ेदारी होगी रोमिल
उसका नाम जो सुबह-शाम लिया करते हो!
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उसको पाने की खवाइश में भीग जाता हूँ रोमिल
मेरी शहर की बरसात ही कुछ ऐसी है
जब बरसती है
उसका चेहरा बना जाती है!
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यह कैसा परिंदा निकला मेरा दिल रोमिल
पानी - पानी भी चिल्लाता रहा
मगर तेरे दर का पानी भी न पिया!
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