अब समझ नहीं आता
ज़िन्दगी गुज़र गई एहसासों को कागज़ पे उतारते-उतारते
अब समझ नहीं आता इन रद्दी के ढेरों का क्या करें?
आँखों से बहते रहे बिना कसूर ही आँसू
अब समझ नहीं आता इस लावारिश बारिश के पानी का क्या करें?
RA
अब समझ नहीं आता इन रद्दी के ढेरों का क्या करें?
आँखों से बहते रहे बिना कसूर ही आँसू
अब समझ नहीं आता इस लावारिश बारिश के पानी का क्या करें?
RA
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