9th August '2006
कभी-कभी यूँ करना
जब याद मेरी आये तो घर की छत पर एक दिया जला देना
या
मेरे नाम लिख खत हवा में उड़ा देना
या
रूखे पड़े होंठों पर एक प्यारी सी मुस्कान खिला देना
या
सुने पड़े हाथों को मेहंदी से सज़ा लेना
या
अपनी खताओं को याद कर आँखों से थोड़ा उबला पानी निकाल देना।
कभी-कभी यूँ करना
रो+मिल
जब याद मेरी आये तो घर की छत पर एक दिया जला देना
या
मेरे नाम लिख खत हवा में उड़ा देना
या
रूखे पड़े होंठों पर एक प्यारी सी मुस्कान खिला देना
या
सुने पड़े हाथों को मेहंदी से सज़ा लेना
या
अपनी खताओं को याद कर आँखों से थोड़ा उबला पानी निकाल देना।
कभी-कभी यूँ करना
रो+मिल
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