कर्ज़
आसमां के नीचे, ज़मीं के ऊपर रहने का कुछ कर्ज़ तो उतारना ही पड़ेगा
अगर वोह साँसें देकर, बंदगी मांगता है, तो क्या बुरा करता है?
इन साँसों का कुछ कर्ज़ तो उतारना ही पड़ेगा।
उसकी कड़वी बातें मुझे रातभर सोने नहीं देती
यह ज़लालत भरी ज़िन्दगी सांसें लेने नहीं देती
रोने से क्या हासिल होगा रो+मिल?
चंद मुठ्ठी भर ढेलियों का कर्ज़ तो उतारना ही पड़ेगा।
इंसाफ चाहिए मुझे!
अपनी हर जलालत का, अपनी हर बेज्जती का
देख नाज़.… इस बार, दोस्ती का कर्ज़ तो उतारना ही पड़ेगा।
रो+मिल
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