खुश्क पत्ते की तरह यादें उड़ा दो
खुश्क पत्ते की तरह यादें उड़ा दो
यह मौसम है हवाओं का मेरे यारों...
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कभी अपने तो कभी पराये थे
यह इंसान नहीं कटपुतलिया है मेरे यारों...
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हवां के तूफानों में भी भूझे नहीं
यह मुहब्बत के दीये है मेरे यारों...
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बड़ी मुद्दतों के बाद उनका सलाम आया
यह उनकी मुहब्बत नहीं, दिल की बेबसी है मेरे यारों...
- रोमिल लखनवी...
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