कभी आकर सजा दो गरीब-खाने को

कभी आकर सजा दो गरीब-खाने को
अपना बना लो मेरे आशियाने को

इजाज़त तो दो मुझे, तुमको एक बार अपना कहने की 
कोई तो किस्सा दो, दोस्तों को सुनाने को

ख़त लिखने, सन्देश देकर आने की जरुरत नहीं है तुमको
मेहमान नहीं हो तुम मेरे, यह बता दो ज़माने को
 
अब आना तो लौटकर वापस मत जाना
यह हुकुम है मेरा छोड़ दो आश्रम वोह दवाखाने को।

- रोमिल लखनवी

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