माँ की यादों का घना कोहरा छाया रहता है

माँ की यादों का घना कोहरा छाया रहता है
आँखों से मौसम भी जमकर बरसता है
दिल में बेताबियाँ लेकर दबे पाँव, मूह फेरकर गुरूद्वारे से लौट पड़ता हूँ    
जब चाँद सा माँ का चेहरा नहीं दिखता हैं। 

और 

दोनों हाथ उठाकर जब उसके लिए बद्दुआ मांगता हूँ 
    सांसें टूटती है, अपनी ज़िन्दगी तबाह करता हूँ। 

पर यह भी सच है
मैं जितना उससे मुहब्बत करता हूँ 
उतना ही उससे नफरत करता हूँ। 

- रोमिल  

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