माँ के स्मरण भर से...
माँ के स्मरण भर से
नैन आंसू भर गए
होंठ खिलखिला उठे
स्वपन सच बन गए.
माँ के स्मरण भर से...
आशाएं बिखरी सवरने लगी
मन के दर्पण खुल गए
सूरज फिर से उगने लगा
जुगुनू, नभ के तारे सो गए.
माँ के स्मरण भर से...
वायु में सुगंध फैलने लगी
फूल भी खिलने लग गए
आश्रय मिला मेरे ह्रदय को
दुःख के सब भाव बादल बन गए.
माँ के स्मरण भर से...
- रोमिल
नैन आंसू भर गए
होंठ खिलखिला उठे
स्वपन सच बन गए.
माँ के स्मरण भर से...
आशाएं बिखरी सवरने लगी
मन के दर्पण खुल गए
सूरज फिर से उगने लगा
जुगुनू, नभ के तारे सो गए.
माँ के स्मरण भर से...
वायु में सुगंध फैलने लगी
फूल भी खिलने लग गए
आश्रय मिला मेरे ह्रदय को
दुःख के सब भाव बादल बन गए.
माँ के स्मरण भर से...
- रोमिल
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