माँ की तलाश में भटकते है रात भर
माँ की तलाश में भटकते है रात भर
मेरे नैना सोते नहीं है रात भर
मेरे गुनाहों का सबब है या फिर पश्चाताप
निगाहों से बंद होते नहीं है आंसू रात भर
माँ जन्नत में हो या फिर मेरे करीब कहीं
खुश रहे हमेशा
लब मेरे यही दुआ देते है रात भर.
सूरज उदय होते ही माँ लौट आएगी मेरे पास
यही खुद को तसल्लियाँ देता हूँ रात भर.
- रोमिल
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