प्यार की झोली समेट कर माँ चली गई ज़िन्दगी समेट कर
प्यार की झोली समेट कर
माँ चली गई ज़िन्दगी समेट कर
मैं दर पर खड़ा रहा अकेला
माँ चली गई राहें समेट कर
थकी धसी आँखें देखती रही मंज़र
माँ चली गई सपने समेट कर
अब किससे कहूं की मेरे लिए दुआ कर
रोमिल, माँ चली गई आशीर्वाद समेट कर.
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