ॐ भूर्भुवः स्वः | तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य | धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ||

ॐ भूर्भुवः स्वः   

तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि  
धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

Om Bhuur Bhuvah Svah 
Tat-Savitur Varennyam Bhargo Devasya Dhiimahi
Dhiyo Yo Nah Pracodayaat || 
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तूने हमें उत्पन्न किया, पालन कर रहा है तू. 
तुझसे ही पाते प्राण हम, दुखियों के कष्ट हरता तू.

तेरा महान तेज है, छाया हुआ सभी स्थान. 
सृष्टि के वस्तु-वस्तु में, तू हो रहा है विद्यमान.

तेरा ही धरते ध्यान हम, मंगाते तेरी दया. 
इश्वर हमारी बुद्धि को, श्रेष्ठ मार्ग पर चला.

दाता हमारी बुद्धि को, वेद मार्ग पर चला.
गायत्री माँ सबका कल्याण करना
सबको सुख-शांति-समृधि-ज्ञान देना
सबके दुखों को दूर करना
माँ का हर पल हमेशा ख्याल रखना
उनका पालन-पोषण करना
जय गायत्री माँ
जय गायत्री माँ
जय गायत्री माँ
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