माँ के हाथों से बनी दाल रोटी याद आती है

माँ के हाथों से बनी दाल रोटी याद आती है
मुझे वही बचपन की बातें याद आती है...

कितने नखरे करता था मैं खाने में
गोदी में बैठाकर, वोह माँ की दुलार याद आती है...

बिस्तर पर दाल गिरा देता था
कमरे में रोटी बिखरा देता है
बड़े प्यार से वोह अन्न की इज्ज़त करना सीखाती थी
वोह सीख याद आती है...

मेरे पीछे कटोरी लेकर दौड़ना
रोमिल, मेरे पीछे कटोरी लेकर दौड़ना
वोह दिन-रात की उसकी भागम दौड़ याद आती है...

माँ के हाथों से बनी दाल रोटी याद आती है
मुझे वही बचपन की बातें याद आती है...

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