नाज़... हमने
नाज़... हमने तुम्हारा नाम मंदिर में लिख दिया है.. सच्ची... वैसे तुम हमारी कुलदेवी... नाज़ कुलदेवी... हा हा हा... नाज़ हम अमृतसर जा रहे है... वोह साले साहेब की रिंग सेरेमनी है... आरे बाबा वोह नानी का चचेरा भाई है... अरे बाबा वोह पीछे लगी हुई थी तो मैंने सोचा कि ठीक है... हमने टिकट भी करवा लिया है... सच्ची बाबा... चलो तुम आराम करो..

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