खुद को और दूसरों को माफ़ करना सीखो
जो कर सकते हो उसे स्वीकार करो और जो नहीं कर सकते उसे भी;
विगत को विगत की तरह स्वीकारो, न उसे नकारो न ही ख़ारिज करो;
खुद को और दूसरों को माफ़ करना सीखो;
कुछ करने से पहले यह मत सोचो कि अब तो बहुत देर हो गई है.
हर मंगल मारी के संग
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