घर में आईने का आखिर क्या करना है
घर में आईने का आखिर क्या करना है
अपना मासूम सा चेहरा तलाश करना है...
कर चुके हो कितनों को तुम रुसवा
अब नहीं किसी को उदास करना है...
अंधेरों को दूर करके रास्तों से
चिरागों को रोशन करना है...
खुद के सर से गुनाह का भोझ उतर कर रोमिल
अपनी पाक-ए-रूह को जिस्म से आज़ाद करना है...
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