किस तरह मैं यह फैसला कर लूं...
किस तरह मैं यह फैसला कर लूं
जिसने दिया मुझे धोखा उसे कैसे मैं अपना बना लूं...
पत्थर बना दिया जिसने इस मोम से दिल को
उस दिल में कैसे मैं उसकी तस्वीर रख लूं...
जो ज़ख्म दिलाते है मुझे याद अपनी औकात हर पल
उन ज़ख्म पर कैसे मैं मरहम रख लूं...
क्यों अपने दर्द की दास्ताँ मैं कागज़ पर लिखूं रोमिल
उस बेवफा की क्यों मैं निशानी रख लूं...
किस तरह मैं यह फैसला कर लूं...
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