चलो मोहब्बत की दूरियों को मिटाया जाये
चलो मोहब्बत की दूरियों को मिटाया जाये
कभी उनके घर जाया जाये
कभी उनको अपने घर बुलाया जाये...
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जहाँ देखो वही दुश्मनी का अँधेरा फैला हुआ है
इस दौर में भी दोस्त का सवेरा उगाया जाये...
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मोहब्बत रुला देती है
चेहरे से रौनक मिटा देते है
फिर भी दिल में महबूब की यादों को सजाया जाये
मट्टी में मिल कर भी मोहब्बत निभाया जाये...
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नफरतों के तीर खां कर तेरे शहर में
अश्कों में आंसू छुपा कर तेरे शहर में
रोमिल साँसों से हर पल उसको पुकारा जाये...
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चलो मोहब्बत की दूरियों को मिटाया जाये....
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