अँधेरे में दीप जलाया करो...
अँधेरे में दीप जलाया करो
ग़मों में भी मुस्कुराया करो
घने बादलों में से सूरज की तरह निकल आया करो
कश्ती जब हो तूफानों में
लहरों को चीर कर
आगे बढ़ा करो
तुम डर नहीं
तुम डर नहीं
उठो
अँधेरे में दीप जलाया करो
ग़मों में भी मुस्कुराया करो
[written by romil arora - copyright reserved]
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