अब रिश्ता न रहा...

तेरे मेरे बीच अब कोइए रिश्ता न रहा
जिस्म तो जिस्म
रूह का भी अब रिश्ता न रहा...

न कोइए वादा
न कोइए क़सम
न कोइए बीती यादों का काफिला रहा
जिस्म तो जिस्म
रूह का भी अब रिश्ता न रहा...

रास्ते भी तूने खुद बनाये थे
तोड़े भी तूने खुद
अब तुझसे मिलाने का कोइए रास्ता न रहा
जिस्म तो जिस्म
रूह का भी अब रिश्ता न रहा...
[written by romil - copyright reserved]

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