बड़ा अजीब आदमी हुआ करता था

बड़ा अजीब आदमी हुआ करता था 
किसी को चोट लगे तोह रोने लगता था
गम में किसी को देख ले तोह खुदा से लड़ने लगता था
बड़ा अजीब आदमी हुआ करता था 
***
बहुत प्यार था उसे परिंदों-जानवरों से
परिंदों को दाना दिया करता था
जानवरों को खाना दिया करता था 
बड़ा अजीब आदमी हुआ करता था...
***
मस्जिद की दीवार पर बैठ कर राम को याद किया करता था
मंदिर में कुरान की बातें किया करता था
बड़ा अजीब आदमी हुआ करता था...
***
सज्जनों को बिखर जाने को कहता था
दुर्जनों को साथ रहने को कहता था
बड़ा अजीब आदमी हुआ करता था...
*
कोई उसे पत्थर मारे तोह उसे आशीर्वाद दिया करता था
न किसी को पराया, न किसी को दुश्मन समझता था 
बड़ा अजीब आदमी हुआ करता था...
[written by romil - copyright reserved]

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