उसके इत्र की खुशबू आती रही रात भर

उसके इत्र की खुशबू आती रही रात भर
यह सर्द हवा भी कहीं दूर से उसका संदेशा लाती रही रात भर...
*
मैं चादरों में लिपटा रहा रात भर
बदन को उसकी तस्वीरों से रगड़ता रहा रात भर...
*
उसके हंसी के फूलों की महक मैं लेता रहा रात भर
खवाबों के महल में मदहोश रहा मैं रात भर..
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चांदनी रात, सितारों का आलम आसमा में रहा रात भर
मेरे बिस्तर पर भी कोइए परी बैठी रही रात भर...
[written by Romil - copyright reserved]

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