My Horoscope


चरित्र
Romil, आप एक संवेदनशील एवं भावुक व्यक्ति हैं। जीवन कीकठनाइयों का आप पर अन्य लोगों की तुलना में ज्यादा प्रभाव पड़ता हैपरिणामस्वरूप आप जीवन के कुछ सुखद पल खो देते हैं। दूसरों द्वार कही गयींबातों को आप दिल पर ले लेते हैं। अतः कुछ एसी बातें है जो आपको दुःख देतीहैं परन्तु उस पर ध्यान नहीं दिया जाना चाहिये।आपके कार्य करने का तरीका शान्तिपूर्ण है,परिणामस्वरूप आप अपने सहकर्मियों की नजर में इच्छाशक्ति-युक्त एवंदृढ-निश्चयी प्रतीत होते हैं। यह आपको अपना लक्ष्य प्राप्त करने में आपकीमदद करता है।आप बोलने से अधिक सोचते हैं और आपका यह चिन्तनतार्किक होता है। लोग आपसे सलाह मांगने इसलिये आते हैं क्योंकि आपका निर्णयपालन करने योग्य और निष्पक्ष होता है।आपमें अनेक उत्तम गुण हैं। आप एक सहानुभूतिपूर्णमनुष्य हैं, जोकि आपको एक अच्छा मित्र बनाता है। आप अनुरागी व देशभक्तहैं, यही कारण है कि आप एक अच्छे नागरिक भी हैं। आप प्यारे माता/पिता होंगे।आप अपने माता-पिता की इच्छानुसार कार्य करेंगे। निश्चय ही आपकी ये अच्छाइयांदूसरों पर भारी पड़ेंगी।
सौभाग्य व संतुष्टि
Romil, आप साहसी व महत्वाकांक्षी हैं। आप अपनी योजना पूर्णकरने के लिये जोखिम लेने से नहीं घबराते। आप बहुत क्रियाशील व्यक्ति हैं वऔरों को भी क्रियाशील बना देते है। आप एक व्यस्त व्यक्ति हैं और सदैव हीरचनात्मक कार्य करते रहते हैं। आप अपनी ऊर्जा का गलत प्रयोग नहीं करते हैं। यदिआप अपनी कार्य-योजना से सन्तुष्ट नहीं होते हैं, तो उसे परिवर्तित करनेसे नहीं घबराते।
जीवन शैली
Romil, आपकी सफलता में आपके सहकर्मी प्रेरणा का काम करतेहैं। अतः अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए आप अन्य लोगों पर निर्भर रह सकतेहैं।

प्रेम आदि
Romil, प्रेम आपके लिये भोजन की ही तरह आवश्यक है। आपकेअन्दर गहरे लगाव का विशेष गुण है, जोकि आपको एक बेहतरीन जीवनसाथीबनाता है। आपको अपने से निम्नवर्ग के व्यक्ति से विवाह नहीं करना चाहिए, क्योंकिआपमंे इस तरह के संयोग को सफल बनाने की सहनशीलता नहीं है। आप अत्यधिकसम्मोहक हैं और कलात्मक व्यक्तियों के साथ सम्बन्ध तलाशते हैं।
स्वास्थ्य
Romil, आपकी स्वास्थ्य-संरचना बहुत अच्छी है, लेकिन आपस्नायु-विकार एवं अपच से पीडि़त रह सकते हैं। पहले का कारण आपकी ज़रूरत सेज़्यादा सम्वेदनशील प्रकृति है। आप अपेक्षाकृत शीघ्रता से अपनी जीवन-ऊर्जाखो देते हैं; और वह जीवन, आप जिसका आनन्द लेते हैं, इसमें आपकी कोई मददनहीं करता। अतिभोग, अपच का मुख्य कारण है। अपच का मुख्य कारण अधिकता में लियागया भोजन है। जो आप खाते हैं, या तो वह वहुत भारी होता है या दिन मेंबहुत देरी से लिया हुआ होता है।
रुचि
Romil, ‘आउटडोर‘ आपके खाली समय का अधिकांश भाग लेताहै और आप इसे बहुत ही लाभदायक पाते हैं। लेकिन डर यह है कि आप उसे ज़रूरत सेज़्यादा कर सकते हैं तथा अपनी शारीरिक संरचना को क्षति पहुंचा सकते हैं। आपखुले में घूमना पसन्द करते हैं, अतः यदि आपको घुड़सवारी आकर्षित नहींकरती है तो यह निश्चित है कि आप तेज़ मोटरिंग या सम्भवतः ट्रेन में लम्बी यात्रापसन्द करते हों। आप पुस्तकों अथवा शैक्षिक यात्राओं से स्वयं को शिक्षित करनेमें रुचि रखते हैं। सम्भवतः इस प्रयास के द्वारा आप ज्ञान से अधिक सन्तोषप्राप्त करते हैं।

रोजगार
Romil, आप अपने कर्तव्यों को गम्भीरता पूर्वक लेते हैं,परिणामस्वरूप आप महत्वाकांक्षी हैं और आपके वरिष्ठकर्मी आपको अतिरिक्तजि़म्मेदारी देंगे। अतः आपको अपने भविष्य के लिये नेतृत्व से जुड़ा क्षेत्रचुनना चाहिए।
व्यवसाय
Romil, ऐसे कई कार्यक्षेत्र हैं जहाँ आप सफल हो सकते हैं।ऐसा कोई भी कार्य, जिसमें परीक्षा उत्तीर्ण करनी पड़ती है आपकी क्षमताओं केभीतर है, क्योंकि आप शीघ्र सीखने वाले हैं और सफलता के रास्ते की कठनाइयांआपको परेशान नहीं करती हैं। आप एक उत्तम पत्रकार हो सकते हैं, अच्छे गुप्तचर भीहो सकते हैं। आपकी सूक्ष्म समझ विभिन्न कार्यो में उपयोगी है।
वित्त
Romil, वित्त संबन्धी मामलों में, आपको किसी बात की चिन्ताकी आवश्यकता नहीं है। आपके मार्ग में कई सुअवसर आएंगे। आप शून्य से भी काफीकुछ बना सकते हैं, बड़ी एवं उतार-चढ़ाव वाली योजनायें, आपका एकमात्रजोखिम हैं। वित्त के सम्बन्ध में आप अपने मित्रों के लिये, यहंा तक कि स्वयं केलिये एक पहेली होंगे। आप अपने धन का असामान्य तरीकों मे निवेश करेंगे।सामान्य तौर पर, आप पैसा बनाने में सफल रहेंगे मुख्यतः जमीन, घर, अचल सम्पत्तिसे जुडे हुए क्षेत्रों में।

मंगलदोष विवेचन

सामान्यत: मंगल दोष जन्म-कुण्डली में लग्न और चन्द्र से देखा जाता है।

आपकी कुण्डली में मंगल लग्न से सप्तम भाव में व चंद्र से दशम भाव में है।
अत: मंगल दोष लग्न कुण्डली में उपस्थित है और चंद्र कुण्डली में उपस्थित नहीं है।
ऐसा माना जाता है कि मंगल दोष वैवाहिक जीवन में समस्याएँ खड़ी करता है।
ऐसा माना जाता है कि अगर एक मांगलिक व्यक्ति दूसरे मांगलिक व्यक्ति से विवाह करता है तो मंगल दोष रद्द हो जाता है।

ग्रह शांति (अगर मंगल दोष उपस्थित हो तो)

उपाय (विवाह से पहले किए जाने चाहिए)

कुंभ विवाह, विष्णु विवाह और अश्वत्थ विवाह मंगल दोष के सबसे ज़्यादा मान्य उपाय हैं। अश्वत्थ विवाह का मतलब है पीपल या बरगद के वृक्ष से विवाह कराकर, विवाह के पश्चात् उस वृक्ष को कटवा देना।

उपाय (विवाह पश्चात् भी किए जा सकते हैं।)
  • केसरिया गणपति अपने पूजा गृह में रखें एवं रोज़ उनकी पूजा करें।
  • हनुमान जी की पूजा करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  • महामृत्युंजय का पाठ करें।
उपाय (ये लालकिताब आधारित उपाय हैं जोकि विवाह पश्चात् किए जा सकते हैं)
  • चिड़ियों को कुछ मीठा खिलाएँ।
  • घर पर हाथी-दांत रखें।
  • बरगद के पेड़ की पूजा मीठे दूध से करें।
नोट: हमारा सुझाव है कि इन उपायों को करने से पूर्व किसी योग्य ज्योतिषी की सलाह ले लें।
सूर्य राशि आपके 4 th भाव में स्थित है
यदि सूर्य शुभ है तो जातक बुद्धिमान, दयालु और अच्छा प्रशासक होगा। उसके पास आमदनी का स्थिर श्रोत होगा। ऐसा जातक मरने के बाद अपने वंशजों के लिए बहुत धन और बडी विरासत छोड जाता है। यदि चंद्रमा भी सूर्य के साथ चौथे भाव में स्थित है तो जातक किसी नए शोध के माध्यम से बहुत धन अर्जित करेगा। ऐसे में चौथे भाव या दसम भाव का बुध जातक को प्रसिद्ध व्यापारी बनाता है। यदि सूर्य के साथ बृहस्पति भी चौथे भाव में स्थित है तो जातक सोने और चांदी के व्यापर से अच्छा मुनाफा कमाता है। यदि चौथे भाव में सूर्य अशुभ है तो जातक लालची होगा। जातक को चोरी करने और दूसरों को नुकसान पहुचाने में मजा आता है। यह प्रवृत्ति अंततः बहुत बुरे परिणाम को जन्म देती है। यदि शनि सातवे भाव में हो तो जातक को रतौंधी रोग हो सकता है। यदि सूर्य चौथे भाव मे पीडित हो और मंगल दसम भाव में हो तो जातक की आंखों में दोष हो सकता है लेकिन उसकी किस्मत कमजोर नहीं होगी। यदि अशुभ सूर्य चतुर्थ भाव में हो साथ ही चंद्रमा पहले या दूसरे भाव में हो और शुक्र पंचम भाव तथा शनि सातवें भाव में हो तो जातक नपुंसक हो सकता है।
उपाय:
(1) जरूरतमंद और अंधे लोगों को दान दें और खाना बांटें।
(2) लोहे और लकड़ी के साथ जुड़ा व्यापार न करें।
(3) सोने, चांदी और कपड़े से सम्बंधित व्यापार, लाभकारी रहेंगे।
चंद्र राशि आपके 10 th भाव में स्थित है
दसवां घर हर तरीके में शनि द्वारा शासित है। यह घर चौथे घर के द्वारा देखा जाता है, जो चंद्रमा द्वारा शासित होता है। इसलिए इस घर में स्थित चंद्रमा जातक को 90 साल की लंबी आयु सुनिश्चित करता है। चंद्रमा और शनि आपस में शत्रु हैं इसलिए, तरल रूप में दवाओं का सेवन जातक को हमेशा हानिकारक साबित होंगी। रात में दूध का सेवन जहर के समान कार्य करता है। यदि जातक चिकित्सक है तो उसके द्वारा रोगी को दी जाने वाली दवाएं यदि शुष्क हों तो मरीज पर इलाज का जादुई प्रभाव पड़ेगा। यदि जातक सर्जन है तो वह सर्जरी के माध्यम से वह महान धन और प्रसिद्धि अर्जित करेगा। यदि दूसरा और चौथा भाव खाली हो तो जातक पर पैसों की बरसात होगी। यदि शनि पहले भाव में स्थित हो तो विपरीत लिंगी के कारण जातक का विनाश हो जाता है, विशेषकर विधवा जातक के विनाश का कारण बनती है। शनि से संबंधित वस्तुएं और व्यवसाय जातक के लिए फायदेमंद साबित होगा।
उपाय:
(1) धार्मिक स्थानों की यात्रा भाग्य वृद्धि में सहायक होगी।
(2) बारिस अथवा नदी का प्राकृतिक जल किसी कंटेनर (कनस्तर) में भर कर अपने घर के भीतर 15 साल तक रखें। यह दसम भाव में स्थित चंद्रमा के विषाक्त और बुरे प्रभाव को धो देगा।
(3) रात में दूध न पिएं।
(4) दुधारू पशु न तो आपके घर में लंबे समय तक रह पाएंगे और न ही वो आपके लिए फायदेमंद और शुभ साबित होंगे।
(5) शराब, मांस, और व्यभिचार से बचें।
मंगल राशि आपके 7 th भाव में स्थित है
यदि घर में शुक्र और बुध, के प्रभाव के अंतर्गत आता है जो कि आपस में मिलकर सूर्य का फल देते हैं। यदि मंगल सातवें भाव में है तो सातवां भाव मंगल और सूर्य के प्रभाव के अंतरगत आएगा जो यह सुनिश्चित करता की जातक की महत्वाकांक्षा पूरी हो जाएगी। धन संपत्ति, और परिवार में वृद्धि होगी। लेकिन अगर बुध भी मंगल ग्रह के साथ स्थित है तो बुध से संबंधित बातों और रिश्तों जैसे, बहन, भाभी, नर्सों, नौकरानी, तोता, बकरी आदि प्रतिकूल प्रभावी होंगी अत: इनसे दूर रहना बेहतर होगा।
उपाय:
(1) समृद्धि के लिए घर में चांदी का ठोस टुकड़ा रखें।
(2) हमेशा बेटी, बहन, भाभी और विधवाओं को मिठाई भेंट करें।
(3) बार बार एक छोटी सी दीवार बनाएं और गिराएं। 
बुध राशि आपके 4 th भाव में स्थित है
चौथे घर में बुध वाला जातक भाग्यशाली माना जाता है, अपनी माँ का दुलारा, अच्छा व्यापारी और सरकार से लाभ पाने वाला होता है। हालांकि इस घर में बुध जातक की आय और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
उपाय:
(1) मानसिक शांति के लिए चांदी की चेन पहने और धन-संपत्ति पाने के लिए सोने की चेन पहनें।
(2) माथे पर 43 दिनों के लिए नियमित रूप से केसर का तिलक लागाएं।
(3) बंदरों को गुड खिलाएं और उनकी सेवा करें।
गुरु राशि आपके 7 th भाव में स्थित है
सातवां घर शुक्र का होता है, अत: यह मिश्रित परिणाम देगा। जातक का भाग्योदय शादी के बाद होगा और जातक धार्मिक कार्यों में शामिल होगा। घर के मामले में मिलने वाला अच्छा परिणाम चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर करेगा। जातक देनदार नहीं हो सकता है लेकिन उसके अच्छे बच्चे होंगे। यदि सूर्य पहले भाव में हो तो जातक एक अच्छा ज्योतिषी और आराम पसंद होगा। लेकिन यदि बृहस्पति सातवें भाव में नीच का हो और शनि नौवें भाव में हो तो जातक चोर हो सकता है। यदि बुध नौवें भाव में हो तो जातक के वैवाहिक जीवन परेशानियों से भरा होगा। यदि बृहस्पति नीच का हो तो जातक को भाइयों से सहयोग नहीं मिलेगा साथ ही वह सरकार के समर्थन से भी वंचित रह जाएगा। सातवें घर में बृहस्पति पिता के साथ मतभेद का कारण बनता है। ऐसे में जातक को चाहिए कि वह कभी भी किसी को कपड़े दान न करे, अन्यथा वह बडी गरीबी की चपेट में आ जाएगा।
उपाय:
(1) भगवान शिव की पूजा करें।
(2) घर में किसी भी देवता की मूर्ति न रखें।
(3) हमेशा अपने साथ किसी पीले कपडे में बांध कर सोना रखें।
(4) पीले कपडे पहने हुए साधु और फ़कीरों से दूर रहें। 
शुक्र राशि आपके 3 rd भाव में स्थित है
यहाँ स्थित शुक्र जातक को एक आकर्षक व्यक्तित्व देता है जिससे हर स्त्री उसकी ओर आकर्षित होती है। आम तौर पर सभी उसे प्यार करते हैं। यदि जातक किसी और स्त्री से संबंध रखता है तो जातक को अपनी पत्नी की चापलूसी करनी पडती है। अन्यथा वह हमेशा अपनी पत्नी पर हावी रहता है। हालांकि जातक की पत्नी सब पर हावी रहेगी लेकिन यदि जातक पराई स्त्री से संबंध नही रखता हो वह उस पर हावी रहेगा। जातक की पत्नी साहसी, समर्थक और बैलगाड़ी के दूसरे बैल की तरह जातक के लिए सहयोगी होगी। वह जातक को छल, चोरी और नुकसान से बचाने वाली होगी। अन्य महिलाओं के साथ संपर्क जातक के लिए हानिकारक साबित होगा और दीर्घायु पर प्रतिकूल असर डालने वाल होगा। यदि नवम और एकादश भाव में शुक्र के शत्रु ग्रह स्थित हों तो प्रतिकूल परिणामों की प्राप्ति होगी। जातक के कई बेटियां होंगी।
उपाय:
(1) अपनी पत्नी का सम्मान करें और अतिरिक्त वैवाहिक मामलों से बचें।
(2) पराई औरतों के साथ छेड़खानी (फ्लर्ट) करने से बचें।
शनि राशि आपके 6 th भाव में स्थित है
यदि शनि ग्रह से संबंधित काम रात में किया जाय तो हमेशा लाभदायक परिणाम मिलेंगे। यदि शादी के 28 साल के बाद होगी तो अच्छे परिणाम मिलेंगे। यदि केतु अच्छी स्थित में हो जातक धन, लाभदायक यात्रओं और बच्चों के सुख का आनंद पाता है। यदि शनि नीच का हो तो शनि से सम्बंधित चीजें जैसे चमडा, लोहा आदि को लाना हानिकारक होता है, खासकर तब, जब शनि वर्षफल में छठवें भाव में हो।
उपाय:
(1) एक काला कुत्ता पालें और उसे भोजन करायें।
(2) नदी या बहते पानी में नारियल और बादाम बहाएं।
(3) सांप की सेवा बच्चों के कल्याण के लिए फायदेमंद साबित होगी।
राहु राशि आपके 3 rd भाव में स्थित है
यह राहु का पक्का घर है। तीसरा घर बुध और मंगल से प्रभावित होता है। यदि यहां राहू शुभ हो तो, बहुत धन दौलत वाला और दीर्घायु होता। वह एक निडर और वफादार दोस्त होता है। वह सपनों के माध्यम से भविष्य देख सकेगा। वह कभी नि:संतान नहीं होगा। वह शत्रुओं पर विजय पाने वाला होगा। वह कभी भी कर्जदार नहीं रहेगा। वह अपने पीछे सम्पत्ति छोड जाएगा। अपने जीवन के 22वें वर्ष में वह प्रगति करेगा। लेकिन अगर राहू तीसरे घर में अशुभ है तो उसके भाई और रिश्तेदार अपने पैसे बर्बाद करेंगे। वह किसी को पैसे उधार देगा तो वापस नहीं मिलेंगे। जातक में वाणी दोष होगा और वह नास्तिक होगा। यदि सूर्य और बुध भी राहू के साथ तीसरे घर में हों तो उसकी बहन अपनी उम्र के 22वें या 32वें साल में विधवा हो सकती है।
उपाय:
(1) घर में कभी भी हाथीदांत या हाथीदांत की वस्तुएं न रखें।
केतु राशि आपके 9 th भाव में स्थित है
नौवां घर बृहस्पति का होता है जो केतू के पक्षधर हैं। नौवें भाव में केतू उच्च का माना जाता है। ऐसा जातक आज्ञाकारी और भाग्यशाली होता है। जातक का धन बढता है। यदि केतू शुभ हो तो जातक अपने प्रयासों से धनार्जन करता है। प्रगति होगी लेकिन स्थानांतरण नहीं होगा। यदि जातक अपने घर में सोनें की ईंट रखे तो धानागमन होता है। जातक का पुत्र भविष्य का अनुमान लगाने में सक्षम होगा। जातक अपने जीवन का एक बहुत बडा हिस्सा विदेशी भूमि में व्यतीत करता है। यदि चंद्रमा शुभ हो तो जातक अपने ननिहाल वालों की मदद करता है। यदि यहां पर केतू अशुभ हो तो जातक मूत्र विकार, पीठ में दर्द, और पैरों की समस्या से ग्रस्त होता है। जातक के बच्चे मरते जाते हैं।
उपाय:
(1) एक कुत्ते पालें।
(2) घर में सोने का एक आयताकार टुकड़ा रखें।
(3) कान में सोना पहनें।
(4) बड़ों का सम्मान करें, विशेषकर ससुर का सम्मान जरूर करें।

कालसर्प दोष / योग - कालसर्प उपाय

परिणाम: आपकी कुण्डली कालसर्प दोष / योग से मुक्त है।
आपका जीवन रत्न
जीवन-रत्न लग्न के स्वामी का रत्न है। इस रत्न की रहस्यमयी शक्तियों का अनुभव करने के लिए इसे जीवन भर धारण किया जा सकता है। जीवन रत्न धारण करना सारी बाधाएँ मिटा सकता है और जातक को प्रसन्न, सफल व समृद्ध कर सकता है। सामान्यतः इसे व्यक्ति की सर्वांगीण उन्नति के लिए धारण किया जाता है। इसके ब्रह्माण्डीय तरंगें व्यक्ति के सम्पूर्ण अस्तित्व को प्रभावित करती हैं।
सुझाव
रत्न-सुझाव
मूंगा
रत्न की गुणवत्ता
3 रत्ती (18 रत्ती अधिक लाभपूर्ण)
धारण करने के नियम
स्वर्ण धातु या चाँदी धातु, अनामिका अंगुली में
रत्न-धारण का मंत्र
ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:
आपका पुण्य-रत्न
जीवन परिश्रम और भाग्य का बढ़िया सम्मिश्रण है। अपना पुण्य-रत्न धारण करके भाग्य को अपने हित में कार्य करने दें। व्यक्ति का पुण्य-रत्न वह होता है, जो उस व्यक्ति के सौभाग्य को आकर्षित करके उसके जीवन में सुखद आश्चर्य घोलता रहता है। हमारे अनुसार आपका पुण्य-रत्न है -
सुझाव
रत्न-सुझाव
माणिक्य
रत्न की गुणवत्ता
2 रत्ती
धारण करने के नियम
स्वर्ण धातु, अनामिका अंगुली में
रत्न-धारण का मंत्र
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम:
आपका भाग्य-रत्न
भाग्य-रत्न का निर्धारण नवम भाव के स्वामी के आधार पर किया जाता है। जब आपको वाक़ई भाग्य की आवश्यकता होती है, यह रत्न उस समय नियति को आपके पक्ष में करता है। व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में यह सकारात्मकता प्रवाहित करता है। आपकी समृद्धि के मार्ग में जो भी बाधाएँ हों, भाग्य-रत्न उन्हें दूर करने का कार्य करता है।
सुझाव
रत्न-सुझाव
पुखराज
रत्न की गुणवत्ता
2 रत्ती
धारण करने के नियम
स्वर्ण धातु, तर्जनी अंगुली में
रत्न-धारण का मंत्र
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:
आवश्यक जानकारी
रत्न-धारण करते समय कुछ बातों का सदैव ध्यान रखें। केवल असली रत्न ही ख़रीदें, क्योंकि नक़ली रत्न धारण करने से उनका कोई प्रभाव नहीं होता है। साथ ही आपको उस वज़न का रत्न धारण करना चाहिए, जिसका सुझाव दिया गया हो। इसे प्रायः “रत्ती” के माध्यम से इंगित किया जाता है। आज-कल बाज़ार नक़ली रत्नों से भरे पड़े हैं।
||  नामकरण सुझाव (बीटा)  ||
आपकी राशि मकर और नक्षत्र उ0षाढा हैं।  आपका जन्म नक्षत्र के तृतीय चरण में हुआ है। इस आधार पर ऐस्ट्रोसेज आपको निम्नलिखित नाम सुझाता है:

आपकी राशि के अनुसार आपके नाम का प्रथम अक्षर: जा 

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